Sunday, September 27, 2009

वो हॅसीन एक ख्वाब़ थी

वो हॅसीन एक ख्वाब़ थी


मेरी जागती आँखों का, वो हॅसी एक ख्वाब़ थी

उस अंधेरी रात में वो, तेज रोशनी सी एहसास थी.


लग रही थी खुब़ वो तो, आसमानी लिवास़ में,

बड़ी अदब़ थी नज़रें उनकी, कुछ अलग वो पहचान थी.


मिलती थी नजरें जो उनसे, चेहरा छुपा लेती,

देख कर भी देखुँ उसको, वो अज़ब ही प्यास थी.


क्या थी खुशबु सॉसों की, जो हवा मॅहकाती थी,

और लव़ों की सुर्खियाँ, जैसे गुलों की ताज़गी.


मै नशे में था कहाँ ! पर होश अपना भी नहीं था,

वो हय़ा थी या अदा थी, मै तो समझा भी नहीं था.

गुलफ़ाम था वो हुस्ऩ उनका, जो मै ही मै बरसाती थी.


कुछ कहो अब, चुप ना रहो, दिल मेरा बेताब था,

इस तरफ़ था शोर इतना, फिर वो खामोश थी.


बीता सफ़र वो चली गई, कुछ भी उनसे कह ना पाया,

दिल ने समझाया मुझको, वो मेरी तलाश़ थी.

-- राकेश झा


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18 comments:

  1. Hi ye bhi mast hai ..........
    bahut mast ......

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  2. रच्छी अभिव्यक्ति है विजयदशमी की शुभकामनायें

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  3. अच्छा लिखा है कविता काफी भावपूर्ण है। निरंतर लिखे बेहतर होगा। बहुत सुंदर

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  4. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत हैं, लेखन कार्य के लिए बधाई
    यहाँ भी आयें आपके कदमो की आहट इंतजार हैं,
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  5. बहुत सुन्दर गीत, वाह वाह ..,
    आपका स्वागत है ,आप् खूब लिखें और बेहतर लिखें ..मक्
    पुराने हिंदी गानों में रूचि हो तो हमारे ब्लोग्स पर जरुर पधारें

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  6. Bahut khub... Rakesh bhai.. maja aa gaga..
    Aap isme pure andaj mein ho aapne.. behatrin...

    I also read my uncle's blog at
    http://ngoswami.blogspot.com

    Shayad aapko inki gajalein aur pasand aaye..

    Balle Balle.
    -R

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  7. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....

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  8. Gud work Rakesh, u have a lot of talent for poetry, keep it up !!

    A new one:

    रह-रह कर तेरी याद जो आए तो क्या करुं ?
    याद तेरी, मेरे दिल से न जाए तो क्या करुं?

    सोचता हूं की चलो कम से कम
    होगी तुम से मुलाकत ख्वाबों में,
    रात भर नींद ही न आए तो क्या करुं?

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  9. आपका स्वागत है
    आपको पढ़कर अच्छा लगा
    शुभकामनाएं


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    प्रत्येक बुधवार सुबह 9.00 बजे बनिए
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  10. बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
    कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .(हटाने के लिये देखे http://www.manojsoni.co.nr )
    कृपया मेरे भी ब्लागस देखे और टिप्पणी दे
    http://www.manojsoni.co.nr और http://www.lifeplan.co.nr

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  11. Mind Blowing.....Heart Touching....!!!

    keep it up dear

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  12. Hi mast likhte ho ..........maine phir se padha .....ha ha ha ....next kab likhooge .....
    waiting for next coming poem

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  13. I found the word talash at the end, very satisfying. As the nayika is withinn reach in the dream and yet gone as your talash. beautiful.

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  14. hi
    thats great
    mujhe nhi malum tha meri dosti itne ache sayar k sath hai
    keep it up

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